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हाल ही में खबरों में यह बताया गया था कि पश्चिम बंगाल में एक गांव, लालबाजार, ढोकरा (जिसे डोकरा भी कहा जाता है) धातु शिल्प (मेटल क्राफ्ट) का केंद्र बन रहा है। इस धातु शिल्प के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह धातु शिल्प, जिसका नाम ‘ढोकरा डामर’ नामक जनजाति के नाम पर रखा गया है, मूल रूप से पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा से दरियापुर तक के क्षेत्र, तथा ओडिशा और मध्य प्रदेश के धातु-समृद्ध क्षेत्रों में पाया गया था।
- वर्तमान में, यह झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना के आदिवासी इलाकों में प्रचलित है।
- यह धातु को ढालने की एक कला है, जो प्राचीन लॉस्ट-वैक्स ढालन तकनीक का उपयोग करती है तथा अलौह धातु का उपयोग करने वाली अपनी तरह की पहली कला है।
- लालबाजार, जिसे ख्वाबग्राम के नाम से भी जाना जाता है, झारखंड से लगी सीमा पर है और यहां लोढ़ा जनजाति के लोग रहते है।
- आमतौर पर इस कला में हाथी, उल्लू, कछुआ, घोड़ा आदि की आकृतियाँ देखने को मिलती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: