भारत तथा अमेरिका ने प्राकृतिक गैस पर एक ज्वाइंट टास्क फोर्स के गठन का निर्णय 17 अप्रैल, 2018 को लिया। यह निर्णय दोनों देशों की सामरिक तथा आर्थिक उन्नति के लिए लिया गया। दोनों पक्षों ने मंत्रिस्तरीय वार्तालाप के दौरान नागरिक परमाणु समझौता को पूर्णतः लागू करने के लिए भी प्रतिबद्धता को दोहराया इस बैठक के पश्चात् जारी संयुक्त व्यक्तव्य के अनुसार,

* नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्रा में सहयोग द्विपक्षीय तंत्रा के माध्यम से विकसित किया जा रहा है।

* अमेरिका तथा भारत द्वारा प्राकृतिक गैस टास्क फोर्स का गठन किया गया है जिसमें भारत तथा अमेरिका के उद्योग के विशेषज्ञ होंगे जो कि भारतीय सरकार को अभिनव नीति सुझाव देंगे जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस के माध्यम से सहयोग किया जा सके।

* यह टास्क फोर्स भारत तथा अमेरिका दोनों देशों के सामरिक तथा आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए काम करेगी।

* ऊर्जा साझेदारी दल सहयोग के संबंधित स्तंभों (पिलर) के लिए भविष्य की कार्य योजना विकसित करेगा।

* ये स्तंभ टीमें (पिलर टीम) अमेरिकी तथा भारतीय उच्चाधिकारियों को नियमित आधार पर रिपोर्ट देंगी।

* सहयोग के अंतर्गत भारत तथा अमेरिका सहयोग के चार प्राथमिक स्तंभों पर कार्य करेंगे तेल  तथा गैस; बिजली तथा ऊर्जा दक्षता; नवीनीकरण  ऊर्जा; और ;सतत  वृद्धि तथा कोयला।

* सामरिक ऊर्जा साझेदारी, ऊर्जा के सार्वभौमिक उपयोग, सुदृढ़ ऊर्जा सुरक्षा तथा विकसित ऊर्जा क्षमता के साथ साझे लक्ष्यों को प्राप्त करने में ऊर्जा की भूमिका को बढ़ाती है।

* साझेदारी महत्वपूर्ण अवसरों का सृजन करेगी जिससे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सहयोगी योजनाएं बनाई जा सकें तथा व्यापारिक निवेश को बढ़ावा मिल सके।

* मुख्य वैश्विक साझेदारों के रूप में अमेरिका तथा भारत यह विश्वास रखते हैं कि ऊर्जा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों में एक केंद्र की तरह कार्य कर सकता है।

* साझेदारी के माध्यम से अमेरिका तथा भारत ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना चाहते हैं तथा ऊर्जा में वृद्धि कर संबंधित ऊर्जा क्षेत्रों में अभिनव कार्य करना चाहते हैं।

* भारत तथा अमेरिका परमाणु संयंत्रा की स्थापना भी करेंगे।

* वेस्टिंगहाउस से संयंत्रों को लाया जाएगा परंतु परमाणु संयंत्रा का निर्माण कार्य ‘न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया’ पर छोड़ दिया जाएगा तथा इसकी विक्रेता/आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा यह कुडनकुलम संयंत्रों की भांति बनाया जाएगा।

* भारत संयंत्रों की कीमतों को कम करने का प्रयत्न कर रहा है। इसके लिए संभवतः लगभग छह संयंत्रों पर एक साथ काम किया जाएगा जिससे इसकी कीमतों में कमी लाई जा सके।

* यह साझेदारी भारत तथा अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को प्रमाणित करती है तथा सरकार और इंडस्ट्री के माध्यम से अधिक गहरे और अर्थपूर्ण अनुबंधों के लिए मंच तैयार करती है।

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