प्रधानमंत्राी नरेंद्र मोदी ने 29 मई, 2018 को इंडोनेशिया की यात्रा की। नरेंद्र मोदी की यह प्रथम इंडोनेशिया यात्रा थी। इस यात्रा में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय निर्णय लिए गए तथा सहयोग के लिए कई विषयों जैसे कि रक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था तथा समुद्री सुरक्षा पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। इस यात्रा के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

*    भारत तथा इंडोनेशिया परस्पर संबंधों को व्यापक सामरिक भागीदारी में रूपांतरित करने के लिए सहमत हुए।

*    यह निर्णय लिया गया कि वर्ष 2025 तक भारत तथा इंडोनेशिया आपसी व्यापार को 50 मिलियन डॉलर तक पहुंचाने के प्रयासों को दोगुना कर देंगे।

*    आंकड़ों को देखा जाए तो दोनों देशों के व्यापार की स्थिति संतोषजनक है। इंडोनेशिया की केंद्रीय सांख्यिकी एजेंसी के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार वर्ष 2016 में 12.9 बिलियन डॉलर था जो कि वर्ष 2017 में 28.7 प्रतिशत बढ़कर 18.13 बिलियन डॉलर हो गया, जिसमें इंडोनेशिया का भारत को निर्यात 14.08 बिलियन डॉलर तथा भारत से आयात 4.05 बिलियन डॉलर है।

*    दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्रा में सेना, नौसेना तथा वायुसेना के बीच आवश्यक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समझौता हुआ।

*    विज्ञान तथा तकनीक, अंतरिक्ष क्षेत्रा में सहयोग, रेलवे तकनीक, स्वास्थ्य तथा दवाओं को लेकर भी समझौते हुए।

*    दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने तथा दोनों पक्षों के लिए लाभदायक व्यापारिक संबंधों को स्थापित करने के लिए संबंधों को स्थापित करने के लिए संबद्ध अधिकारियों को निर्देश दिए गए।

*    दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य सहयोग पर एमओयू के हस्ताक्षरित होने को तथा ‘गरुड़ इंडोनेशिया’ की बाली से मुम्बई सीधी उड़ान की शुरुआत को सराहा।

*    इंडोनेशिया से भारत को निर्यात होने वाले उत्पादों में पाम ऑयल प्रमुख है। पाम ऑयल के व्यापार, निवेश, उत्पाद तथा इंडस्ट्री से संबद्ध दिक्कतों पर विचार-विमर्श हुआ।

*    रेलवे विभाग में सहयोग को सराहा गया जिसमें तकनीकी सहयोग, रेल संबद्ध कार्यक्रमों का विकास, जानकारी का आदान-प्रदान सम्मिलित है।

*    दोनों देशों में व्यापार को बढ़ाने के लिए अंडमान-निकोबार तथा असेह के बीच संपर्क की योजना को भी सराहा गया।

*    भारत तथा इंडोनेशिया के बीच रक्षा, विज्ञान तथा तकनीकी सहयोग सहित कुल 15 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

*    इंडोनेशिया ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बंदरगाह के आर्थिक तथा सैन्य प्रयोग की अनुमति भारत को दी। यह बंदरगाह भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि

(i) बंदरगाह की गहराई 40 मीटर है तथा इतनी गहराई सभी तरह के सैन्य जहाजों के लिए उपयुक्त है।

(ii) यह बंदरगाह अंडमान द्वीप के 710 किमी. दक्षिण-पूर्व में स्थित है तथा मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश से 500 किमी. से भी कम दूरी पर स्थित है।

(iii) मलक्का जलडमरूमध्य से होकर भारत का 40 प्रतिशत व्यापार आता-जाता है।

(iv) मलक्का जलडमरूमध्य विश्व के छह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। ये सभी छह रास्ते वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक माने जाते हैं। इस संकरे जलडमरूमध्य के माध्यम से एक बड़ी मात्रा में तेल को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता है।

भारत सबांग के बंदरगाह तथा आर्थिक क्षेत्र में निवेश करेगा और एक अस्पताल का निर्माण भी करवाएगा। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की सक्रियता को देखते हुए दोनों देशों ने इस प्रकार के सहयोग के विषय में विचार किया। इस द्विपक्षीय सहयोग के कारणों में से एक चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड इनिशिएटिव’ भी है।

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