फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनईएस) तथा भारत की अंतरिक्ष एजेंसी (इसरो) मंगल, शुक्र तथा अन्य एस्टेरॉयड परियोजनाओं पर मिलकर काम करेंगी। इस मामले में फ्रांस तथा भारत के बीच मार्च 2018 में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
इसरो ने मार्स ऑरबिटर मिशन-2 (एमओएम-1) पर कार्य आरम्भ कर दिया है। यद्यपि अभी फ्रांस इस मिशन में सम्मिलित नहीं है। भविष्य में फ्रांस भी इस मिशन से जुड़ सकता है। फ्रांस तथा भारत का अंतरिक्ष मिशन के लिए सहयोग पहली बार नहीं हो रहा है। भारत-फ्रांस सहयोग छह दशकों से भी पुराना है। फ्रांस न सिर्फ भारत को अंतरिक्ष तकनीकों को उन्नत करने में सहायता करता रहा है (जैसे कि क्रायोजेनिक इंजन) बल्कि उसने भारत के सबसे भारी सैटेलाइट्स, जो कि चार टन तक वजनी थे, को प्रक्षेपित भी किया है।
दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित एमओयू के मुख्य बिंदु है
* दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां संयुक्त अभियानों उन्नत प्रसंस्करण औजारों के माध्यम से तथा अन्य देशों से विशेषज्ञता तथा संसाधन जुटा कर जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे। दोनों राष्ट्र जलवायु निगरानी वाले संयुक्त अभियान मेघा-ट्रॉपिक्स तथा सरल-अल्तिका में सहयोग जारी रखेंगे।
* हाई रिजॉल्यूशन में पृथ्वी के चित्रा प्राप्त करने के लिए वर्षों में विकसित हुई तकनीक का लाभ उठाया जाएगा।
* दोनों अंतरिक्ष एजेंसियां संयुक्त उत्पादों और तकनीकों के डिजाइन और विकास के लिए एक साथ मिलकर काम करेंगी। भूमि तथा समुद्र में संपत्ति की निगरानी और संरक्षण के लिए स्वचालित निगरानी प्रणाली भी विकसित की जाएगी।
* दोनों एजेंसियां संयुक्त रूप से(i) विकिरण परिरक्षण समाधान; (ii) कर्मियों की स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली; (iii) मानव अंतरिक्ष उड़ान हेतु मानव-इन-लूप सिम्यूलेटर तथा बायो-ऑस्ट्रोनॉटिक्स की डिजाइन के लिए क्षमताओं और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का विकास करेंगी; (iv) दोनों देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नियमित रूप से सहयोग करेंगे; (v) दोनों एजेंसियां चंद्रमा, मंगल और अन्य ग्रहों में रोवरों के स्वायत्त नेेवीगेशन और ग्रहों की खोज के लिए एयरो ब्रेकिंग प्रौद्योगिकियों तथा मंगल और शुक्र ग्रहों के वायुमंडल की मॉडलिंग पर काम करेंगी; (vi) मौसम तथा जलवायु का अध्ययन करने के लिए उपकरणों और संयुक्त मिशन का विकास; और (vii) दोनों पक्ष अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुसार, तरल ऑक्सीजन-मीथेन प्रणोदन इंजन की प्रौद्योगिकियों, पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण वाहन, तथा विशेष सामग्रियों, नैनो सामग्रियों, उन्नत कंपोजिट, पॉलीमरों, रसायनों, नैनो-प्रौद्योगिकियों और विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग करेंगे।