नेपाल के प्रधानमंत्री  के.पी. ओली 06 अप्रैल, 2018 को तीन दिवसीय यात्रा पर भारत आए। के.पी. ओली की यह भारत यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय से भारत तथा नेपाल के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे। भारत तथा नेपाल के बीच वर्ष 2015 से तनावपूर्ण स्थिति रही जब भारत ने सितम्बर 2015 में प्रख्यापित नेपाली संविधान के लिए अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि संविधान तराई क्षेत्रा के लोगों को कोई शक्ति प्रदान नहीं करता। ओली ने इस संविधान के निर्माताओं में से एक होने के कारण संविधान का बचाव किया। भारत ने नेपाली कांग्रेस, माओवादियों तथा मधेशी लोगों के साथ मिलकर ओली पर दबाव बनाने की कोशिश की जिसके फलस्वरूप ओली ने नेपाल को भारत के बजाए चीन की ओर उन्मुख कर दिया। तनाव को कम करने के लिए भारत में राजनयिक नेपाल भेजा तथा संकेत दिए कि भारत नेपाल से अच्छे संबंध ही चाहता है।

इस यात्रा के दौरान संपन्न द्विपक्षीय बातचीत के मुख्य बिंदु हैं

(i) नेपाल तथा भारत को जोड़ती हुई एक रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। यह एक विद्युतीकृत रेलवे लाइन होगी जो कि भारत में रक्सौल को नेपाल में काठमांडू से जोड़ेगी। इस परियोजना के लिए वित्त सहायता भारत की ओर से की जाएगी। रेलवे की परियोजना पूरी होने पर काठमांडु भारतीय रेल के 115,000 किमी. लंबे रेल तंत्रा से जुड़ जाएगा। इस रेलवे नेटवर्क के माध्यम से भारत से नेपाल आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा तथा दोनों देशों के बीच वस्तुओं की ढुलाई की परिवहन लागत भी कम हो जाएगी।

(ii) दोनों देशों ने सीमापारीय लंबित तीन रेलवे परियोजनाओं को जल्द-से-जल्द पूरा करने का संकल्प लिया तथा दो अन्य परियोजनाओं को भी इस वर्ष पूरा करने का निश्चय किया।

(iii) नेपाल के प्रधानमंत्राी ने जी.बी. पंत विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से नेपाल के कृषि क्षेत्रा को आधुनिकीकरण के द्वारा उन्नत करने के लिए सहायता मांगी। उन्होंने कहा कि भारत के कृषि क्षेत्रा के आधुनिकीकरण में जी.बी. पंत विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। यदि विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता नेपाल के कृषि क्षेत्रा की सहायता करे तो नेपाल में भी उन्नत कृषि की जा सकेगी।

(iv) दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में 69 कि.मी. लंबी अमलेखगानु-मोतिहारी तेल पाइपलाइन के साथ-साथ बीरगंज में एकीकृत चेकपोस्ट का उद्घाटन किया गया।

(v) अंतः स्थलीय जलमार्ग के माध्यम से संपर्क बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया। इस संपर्क से जमीन से घिरे नेपाल की पहुंच समुद्र तक हो सकेगी। जलमार्ग के कारण परिवहन लागत अपेक्षाकृत कम होती है, जिसमें भारत एवं अन्य देशों के साथ नेपाल के व्यापार में वृद्धि होगी।

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