10 फरवरी, 2018 को भारत के प्रधानमंत्राी नरेंद्र मोदी तथा फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के बीच बैठक हुई जिससे यह पता लगता है कि भारत फिलिस्तीन तथा इजरायल के साथ एक संतुलित संबंध रखना चाहता है।

* यद्यपि भारत ने येरूशलम को फिलिस्तीन की राजधानी के रूप में स्वीकार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है, भारत फिलिस्तीन के साथ संबंधों को अधिक सुदृढ़ करने की चेष्टा कर रहा है।

* सरकार के अनुसार, पूर्व में हुई यात्राओं में किए गए समझौतों को पूरा करना ही सरकार की प्राथमिकता है।

* फिलीस्तीन तथा इजरायल दोनों देश भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।

* राज्य सभा में लिखित उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि सरकार की पूर्व येरूशलम को मान्यता देने की कोई योजना नहीं है। यद्यपि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने इजरायल के विरुद्ध मतदान किया था।

* भारत का मानना है कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद को हल करने के लिए बातचीत होनी चाहिए।

* फिलिस्तीन के शरणार्थियों की सहायता हेतु संयुक्त राष्ट्र राहत कार्य अभिकरण द्वारा की गई अपील के बाद भारत ने अपनी ओर से दी जाने वाली सहायता को 1.25 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया। यह बढ़ोत्तरी तीन साल के लिए की गई है।

* नरेंद्र मोदी सरकार के समय इजरायल से भारत के संबंध प्रगाढ़ हुए हैं परंतु सरकार का यह पूरा प्रयास रहा है कि फिलिस्तीन तथा इजरायल दोनों दोनों से संबंध पूर्णतः संतुलित रहें।

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