दिल्ली-एनसीआर में वाहनों पर अलग-अलग रंग के स्टीकर लगाए जाएंगे जिससे यह पता चल सकेगा कि वाहन डीजल, पेट्रोल या फिर सीएनजी में से किस पर चलाया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ जिसमें मदन बी लोकुर तथा एस अब्दुल नजीर सम्मिलित थे, ने पर्यावरणविद एम.सी. मेहता द्वारा दायर याचिका पर यह निर्णय दिया। याचिका में दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण को कम करने हेतु जो कदम उठाए जाने चाहिए को निर्देशित करने के लिए प्रार्थना की गई थी। सरकार की ओर से न्यायालय को प्रस्ताव दिया गया था कि दिल्ली-एनसीआर में कलर कोडेड योजना लागू की जाए। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने इस मामले में न्यायालय को बताया कि नया हॉलोग्राम आधारित कलर कोडेड स्टीकर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये स्टीकर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को पहचानने में सहायक होंगे। इसके साथ ही प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पेरिस का उदाहरण दिया जहां पर कलर-कोडेड योजना चलाई गई है जिससे ऑड-ईवन योजना को भली-भांति लागू किया जा सके। कलर कोडेड वाहनों के साथ यह ऑड-ईवन वाहनों की योजना को आसानी से लागू किया जा सकेगा तथा पुराने वाहनों को भी सरलता से पहचाना जा सकेगा।

सोसाइटी फॉर इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने न्यायालय को कहा कि सरकार द्वारा दिया गया यह सुझाव स्वागत योग्य है तथा सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ग्रीन नंबर प्लेट प्रदान करने का प्रस्ताव भी दिया है।

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने यह भी सुझाव दिया कि सीएनजी तथा हाइड्रोजन के मिश्रित ईंधन के प्रयोग से प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलेगी। यह मिश्रण केवल सीएनजी के प्रयोग से होने वाले प्रदूषण से भी कम प्रदूषण उत्सर्जित करेगा। न्यायालय के निर्देशानुसार अब पेट्रोल तथा सीएनजी से चलने वाले वाहनों पर नीला तथा डीजल से चलने वाले वाहनों पर संतरी रंग का स्टीकर लगाना होगा। हॉलोग्राम आधारित स्टीकर पर वाहनों की पंजीकरण तिथि भी होगी। यद्यपि यह कलर कोडिंग योजना सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में लागू होगी। पीठ ने मंत्रालय को निर्देश दिया है कि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रा में चलने वाले वाहनों में रंगीन स्टीकर के उपयोग के नियम को 30 सितंबर तक लागू किया जाए।

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