भारत के विधि आयोग द्वारा ‘‘लीगल फ्रेमवर्कः गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इंक्लूडिंग क्रिकेट इन इंडिया’’ शीर्षक से 5 जुलाई, 2018 को केंद्र सरकार को प्रस्तुत अपनी 176वीं रिपोर्ट में सट्टे को वैधानिक बनाने की सिफारिश की गई है। आयोग ने टिप्पणी की है कि मौजूदा कानून और पूर्ण प्रतिबंध का सट्टेबाजी पर उचित असर नहीं दिख रहा है और यह धड़ल्ले से हो रही है। घुड़दौड़ हो या लॉटरी, क्रिकेट हो या चुनाव या फिर किसी भी प्रकार से खेला जाने वाला जुआ, इसे वैध बनाने में ही जनता और सरकार का लाभ है।

इसमें पैन कार्ड और आधार के माध्यम से नकदरहित लेन-देन की सिफारिश की गई है जिससे सब कुछ साफ हो और सभी लेन-देन नकदरहित हो।

विधि आयोग ने उजागर किया कि मई 2017 में परामर्श के दौरान भी इसे वैध बनाने के पक्ष में कई गुना अधिक मत और सुझाव आए। इनमें प्रसिद्ध और जनसाधारण दोनों ही लोग बड़ी संख्या में सामने आए।

ऑनलाइन खेल होने से आप किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच जाते हैं और संबंधित विभाग की निगरानी भी रहती है। आयोग ने अपने रिपोर्ट में सर्वोच्च न्यायालय के बीसीसीआई मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया है जिसमें सट्टे को विधिसम्मत बनाने के लिए विधि आयोग के अध्ययन का जिक्र किया गया था।

विधि आयोग की रिपोर्ट इंगित करती है कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 249 और 252 के अंतर्गत इसे प्रदत्त शक्तियों के क्रियान्वयन में सट्टे को विनियमित करने हेतु एक विधि लागू कर सकती है। इसके अलावा रिपोर्ट अनुशंसा करती है कि बेटिंग सर्विस की पहचान के लिए आधार कार्ड का प्रयोग किया जाना चाहिए। गरीबी रेखा से नीचे वाले लोगों, 18 वर्ष से कम आयु के युवाओं और सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने वाले लोगों को सट्टे की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

रिपोर्ट ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के मामले को भी उठाया और सुझाव दिया कि कैसिनो और ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में एफडीआई को प्रोत्साहित करने के लिए विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 और एफडीआई नीति में संशोधन किया जाना चाहिए।

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