अप्रैल, 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए हिन्दू विवाह अधिनियम में संशोधन से इन्कार कर याचिका को खारिज कर दिया। कर्नाटक की एक महिला ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि उसका विवाह उसकी सहमति के बिना हुआ है अतः यह विवाह रद्द किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच दीपक मिश्रा, डी.वाई. चंद्रचूढ़ एवं ए.एम. खानविलकर ने यह फैसला सुनाया।

सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई में कहा कि हिन्दू विवाह अधिनियम में पहले से यह कानून है कि यदि विवाह दोनों पक्षों में से किसी एक ने धोखे या तथ्य छिपा कर किया है तो विवाह रद्द माना जाएगा। इस तरह के मामले में स्थानीय कोर्ट में विवाह को अवैध घोषित करने की अर्जी दाखिल की जा सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 5, 11 और 12(c) का सन्दर्भ दिया जो विवाहपूर्व दुल्हन की सहमति निर्धारित करता है।

वयस्क जोड़ों को शादी के बिना भी साथ रहने का अधिकार—सुप्रीम कोर्ट

6 मई, 2018 को उच्चतम न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वयस्क जोड़ों को शादी के बिना भी एक साथ रहने का अधिकार है। न्यायालय ने व्यवस्था दी कि ‘लिव इन’ संबंधों को अब विधायिका ने भी मान्यता दे दी है और इन संबंधों को महिला घरेलू हिंसा रोकथाम कानून 2005 के प्रावधानों के तहत् जगह मिली है।

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने की पूर्ण स्वतंत्राता तथा अधिकार है। इन अधिकारों को कोई व्यक्ति विशेष, न्यायालय या संगठन छीन नहीं सकता है।

न्यायालय ने यह निर्णय केरल के एक दंपत्ति की याचिका पर दिया। केरल के एक युवक नंदकुमार तथा युवती तुषारा ने वर्ष अप्रैल 2017 में शादी की थी। शादी के समय तुषारा की आयु 19 वर्ष (विवाह के लिए वैध) थी जबकि शादी के समय लड़के नंद कुमार की आयु विवाह के लिए निम्नतम (विवाह के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष) आयु से कम थी, के कारण केरल के उच्च न्यायालय ने तुषारा की कस्टडी पिता को दिए जाने की याचिका को स्वीकृति प्रदान की थी। इस निर्णय के विरुद्ध नंद कुमार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। जिस पर निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि व्यस्क जोड़ा सहमति से एक-दूसरे के साथ रह सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा, शादी के लिए निर्धारित आयु न होने के बावजूद यह पर्याप्त है कि याचिकाकर्ता बालिग हैं और जोड़े को बिना शादी रहने का अधिकार है।

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